It's my complicated blog like my complicated life.
चंद्र ग्रहण
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ग्रहण तो तुम लगा गई…
कुछ जिंदगी में
कुछ सासों में
कुछ बातों में
कुछ यादों में
सारी की सारी रातों में
आज रात का ये 'चन्द्र ग्रहण' कुछ नही है तेरी ग्रहण के सामने…
A POEM by SWARUP KUMAR and RUPAM PATI ये बारिश की बूंदें आज फिर तेरी याद दिला रही हैं भूलना चाहता हूं तुम्हें फिर भी तेरे पास बुला रही है, जनता हूँ कि अब तूम किसी और के साथ भींग रही हो फिर भी मेरी वो छतरी तुम्...
A poem by Swarup kumar and Rupam pati मैंने देखा था तुम्हारे नयनों को, न पूरे होने वाले सपनो में, कह रही थी छोड़कर आओ, अपनो को मेरे उस सपने में। तुम न पूरी होने वाली ख्वाहिश हो फिर भी तेरा ही दीवाना हूँ, तुम जलत...
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