It's my complicated blog like my complicated life.
चंद्र ग्रहण
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ग्रहण तो तुम लगा गई…
कुछ जिंदगी में
कुछ सासों में
कुछ बातों में
कुछ यादों में
सारी की सारी रातों में
आज रात का ये 'चन्द्र ग्रहण' कुछ नही है तेरी ग्रहण के सामने…
सब मिल ही जाता तो मैं लिखता क्या? जो तू मिल जाती तो ये बेवफाई मैं लिखता क्या? जो मुझे तेरी जरा सी मुस्कान मिल जाती तो मैं लिखता क्या? जो तुम्हारी नज़रें मुझसे मिल जाती तो मैं ये दर्द-ए-जुदाई लिखता क्या? मुझे मीठी वाणी मिल जाती तो मैं लिखता क्या? जो तू मुझे शर्माती हुई मिल जाती तो मैं ये रूसवाई लिखता क्या? जो तुम्हारा एक इशारा मिल जाता तो मैं लिखता क्या? अरे कम से कम, तुम्हारी नफ़रत ही मिल जाती तो मैं बेवजह की ये पंक्तियां, लिखता क्या? :- रूपम पति
A POEM by SWARUP KUMAR and RUPAM PATI ये बारिश की बूंदें आज फिर तेरी याद दिला रही हैं भूलना चाहता हूं तुम्हें फिर भी तेरे पास बुला रही है, जनता हूँ कि अब तूम किसी और के साथ भींग रही हो फिर भी मेरी वो छतरी तुम्...
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