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यार मेघ

यार बादल(मेघ) तुम भी ना यार...!! जब भी उत्‍सव मनाने की अभ्‍यासी बगुलियाँ आकाश में पंक्तियाँ बाँध-बाँधकर नयनों को सुभग लगनेवाले तुम्‍हारे समीप पहुँचतीं हैं तब तुम धीरे हो जाते ...