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फिर भी

A POEM by SWARUP KUMAR and RUPAM PATI ये बारिश की बूंदें आज फिर तेरी याद दिला रही हैं भूलना चाहता हूं तुम्हें फिर भी तेरे पास बुला रही है, जनता हूँ कि अब तूम किसी और के साथ भींग रही हो फिर भी मेरी वो छतरी तुम्...