मैंने तुम्हें चाहा है…
A poem by Swarup kumar and Rupam pati मैंने देखा था तुम्हारे नयनों को, न पूरे होने वाले सपनो में, कह रही थी छोड़कर आओ, अपनो को मेरे उस सपने में। तुम न पूरी होने वाली ख्वाहिश हो फिर भी तेरा ही दीवाना हूँ, तुम जलत...
It's my complicated blog like my complicated life.