मेरे आँखों से गिरते नमी की मोती हो तुम, मेरे हृदय से निकली हुई प्रार्थना हो तुम। तेरे आने-जाने पर ढले हैं मेरी शाम के सूरज, शान्ति से माँगी हुई अमर प्रेम की गाथा हो तुम।। - रूपम ...
जब भी देखी वो निगाहें हमने, हाय ख़ुमारी कमाल हम पर छाई है। कमाल कुछ हम पर ऐसी छाई है, उनके साथ हमने भी होली मनाई है। प्रथम की दो पंक्तियाँ copied हैं, बाद कि मेरी हैं। कॉपीराइट इशू है...
अयोध्यानंदन हैं वो दशरथनंदन हैं वो रघु-रघु-रघुनंदन हैं वो। नंदन-वंदन हो जायेगा मन, मन हर्षित-पुल्कित हो जायेगा। रघु-रघु-रघुवंशी श्री राम के शरण में आ कर देखो चरण न देखो उनका...