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हमारा धर्म

हमारे मंदिरों को पुनः प्राप्त करते हुए, हम हमारी परंपराओं को पुनः प्राप्त कर सकते हैं। हमारी परंपराओं को पुनः प्राप्त करते हुए, हम हमारी समुदायों को पुनः प्राप्त कर सकते हैं। हम हमारे समुदायों को पुनः प्राप्त करते हुए, हम हमारी भूमि पुनः प्राप्त करें। कहीं पढ़ा था

बिंदुवार

संपूर्ण सृष्टि अर्थात पृथ्वी पत्थर पेड़ पौधे खनिज संपदा जीव जंतु सब के सब सजीव है चाहे वह भूमि पर पड़ा वह पत्थर क्यों हो वह भी सजीव है। सब बढ़ते तथा घटते हैं और जो भी बढ़ता तथा घटता है वह नष्ट होता है किसी की आयु सीमा बहुत कम होती है तो किसी की बहुत अधिक होती है प्रत्येक को अपने द्वारा बिताया हुआ आयु सीमा बहुत दूसरे की तुलना में उत्तम लगती है। सर्प - मेढक ये एक प्रकार से देखें तो कीट पतंगों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहता है उनकी दृष्टि से देखा जाए तो वे अपना अपना निर्धारित आयु तय करते हैं। इसी प्रकार का पत्थर क्यों ना वह भी घटता या बढ़ता है, संभवत हम देख नहीं सकते हैं हो सकता है कि कई करोड़ों वर्ष में हमारे नाखून के जितनी चौड़ी कम हो। हमें इस बात का ज्ञान नहीं है कि पत्थर कितने समय के अंतराल में और कितनी मात्रा में कम होते हैं किंतु यह सत्य है , जैसे कि कोयला को ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है और था वह भी नष्ट हो जाते हैं अर्थात कुछ वस्तुएं अपनी आकार से बड़ी होती हुई नष्ट होती है तो कुछ अपनी आकार से छोटी होते हुए नष्ट होती हैं। जो अपने आकार से बड़े वही सजीव हो ऐसा कहना अथवा ...

एकलव्य

महाभारत को काल्पनिक कहने वाले कभी एकलव्य को काल्पनिक नहीं कहते हैं। वैसे सनातनी आस्था वाले लोग तो महाभारत को भी वास्तविक ही मानते हैं और महाभारत की घटनाओं को भी, जो कि सर्वथा उचित भी है। महर्षि वेदव्यास प्रणीत सर्वलोकोपकारी, इस विशाल महाग्रंथ में सभी कर्तव्य, धर्म और तत्वों का सार निहित है। हम आज इस बात पर चर्चा करेंगे कि क्या एकलव्य और बर्बरीक पर कोई अत्याचार हुआ था ? क्या एकलव्य का अंगूठा कटवाना अथवा महाभारत युद्ध से पूर्व ही बर्बरीक का मस्तक काटना, अत्याचार या शोषण नहीं था ? महाभारत स्वयं तो एकलव्य एवं बर्बरीक का कोई विस्तृत वर्णन नहीं करता, अपितु सांकेतिक वर्णन करता है, किन्तु उसके खिलभाग हरिवंशम् में अथवा वेदव्यास कृत अन्य ग्रंथों में इनका व्यापक वर्णन मिलता है। सर्वप्रथम हम बर्बरीक पर चर्चा करेंगे। बर्बरीक अत्यंत पराक्रमी राक्षस थे। ये भीम और हिडिम्बा के संयोग से उत्पन्न राक्षसराज घटोत्कच, जो कामाख्या के निकट में मायांग (मायोंग) के राजा थे, के पुत्र थे। इनके भाई का नाम अञ्जनपर्वा एवं माता का नाम कामकटंकटा था। मतांतर से कामकटंकटा का नाम मौर्वी भी था क्योंकि यह मुर दैत्य की पुत्री ...

बूत

बूत परस्त हूँ! अर्थात तुमसे पहले आया तुम्हें दिखे ना, तभी आंसू सुखाते आया खेल के मैदान में हैं विषैले कांटे मैं उन काँटों को उखाड़ते आया मैदान में पहुंचे थे कुछ उद्दंड लड़के ना माने तो कान के नीचे रखते आया काफिर को सच मे डर है पत्थरों का तभी तो तेरे गली में बचते बचाते आया कहते थे 370 हटाई तो आग लगा देंगे हटा दी, तो पत्थरबाज घर को दुबकते आया

नही सुनता

जाने से उसके घर में मिरा कोई वाक़िआत नही सुनता मैं इतना निठल्ला हूँ मेरे घर में भी कोई बात नही सुनता, उस रोज, वो शख़्स मुझे जिते'जी  कैसे मार गया था कहना तो चाहता हूँ मगर  कोई सच्ची वारदात नही सुनता!! गलती से भी कैसे चले गए आप उस मैदान में?? ज़नाब सब खेलते हैं वहां, कोई जज़्बात नही सुनता!! तुम कहाँ ये हिसाब किताब करने खत लिए बैठ गए?? छोड़ कर जाने के बाद कभी कोई सवालात नही सुनता.!!

यम राज

आ ! यम, बैठ मेरे पास बहुत बड़ा है मेरा ये कमरा तू भी महसूस कर, इस अकेलेपन को। बैठ गया ! तो बता कैसा है मेरे बारे में क्यों पूछ रहा मुझसे सिर्फ दर्द की कहानियां मिलेंगी। बैठा रह ! मैं चाय लाता हूँ डावेटिज तो नही है न तुम्हें? मैं उनकी यादों के मिठास से घुला करता हूँ। यार तुम ! सच में आये हो ! आने में इतनी देर कैसे लगा दी ? हाँ ट्रेफिक तो सच मे बढ़ ही गया है। मेरे मित्र ! ये दो बिस्किट कौन खायेगा ? ना…ही इन्हें वापस से डब्बे में नही रख सकता पॉकिट में भर ले.. पॉकिटमार कम हैं। कब से ? जब से डिजिटल हुए आजकल सीधे बैंक से धन गोल किया करते हैं अब तो चोर भी हाइ टेक हो गए हैं। चलो फिर! दोनों चलते हैं से क्या मतलब?? मैं नही जाने वाला, मैं यहाँ अकेला हूँ किसने कहा? संग मेरे अकेलापन भी रहता है। क्या कहा ! मैं झूट कह रहा, नही तो.. तुम्हारी इतनी साहस की मुझे झूठा कह रहे हो?? अब सच कोई सुनता कहाँ? नही बाबा ! तुम जाओ, और हाँ जाते जाते साथ अपने इन स्मृतियों को लेते जाना मैं नही चाहता कि मुझे डावेटिज हो.. अपना ख्याल रखना... यम! महीने में एक दो बार ...

मोहब्बत के दो अफ़साने

मोहब्बत के दो अफ़साने हो कर बेगाने मिलेंगे सड़कों पे नही तो हम,  तुम्हें मयख़ाने में मिलेंगे, गर तू निकाह कर ली  किसी अफसर के साथ तो सुनने मिरे आंखों में धूल जाने के बहाने मिलेंगे, तुम मिरे चेहरे के मुस्कान पे क्यों जाते हो जाना है तो दिल में जाओ, दर्द के तहख़ाने मिलेंगे, किमती वक़्त निकाल के आना मेरी डायरी देखने इसमें कहानियों में सिर्फ तुम्हारे दिखाए सपने मिलेंगे, देखो लौट के आने में तुम ज्यादा देर मत करना वरना हम भी किसी और के दीवाने मिलेंगे                                                 :- रूपम पति